समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों में आयोग के भीतर हुए घटनाक्रम से उसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उनका यह बयान चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्ति जताए जाने की रिपोर्ट के संदर्भ में आया। यादव ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने वाली संस्था के कामकाज में निष्पक्षता जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के समर्थक मतदाताओं को चिन्हित किया गया था। उनके अनुसार, ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। वर्ष 2022 में यादव ने पहले भी उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि यादव और मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए गए। चुनाव आयोग ने उस समय यादव से इन आरोपों के समर्थन में दस्तावेजी सबूत मांगे थे। आयोग ने विधानसभा क्षेत्रवार हटाए गए नामों और संबंधित मतदाताओं की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था। मौजूदा बयान में यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराई हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन पुराने आरोपों पर उस समय सबूत मांगे जाने का रिकॉर्ड मौजूद है।
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