कॉमन मैना को 1862 में फसलों के कीटों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से मेलबर्न लाया गया था। समय के साथ यह पक्षी शहरी इलाकों में तेजी से फैल गया और अब इसे दुनिया की 100 सबसे खराब आक्रामक प्रजातियों में शामिल किया गया है। यह पक्षी घोंसले बनाने की जगहों के लिए स्थानीय प्रजातियों से आक्रामक प्रतिस्पर्धा करता है। इसकी अनुकूलन क्षमता और विविध आहार, जिसमें फल और अनाज शामिल हैं, इसे अलग-अलग वातावरण में पनपने में मदद करते हैं। इसके कारण कृषि और स्थानीय जैव विविधता पर असर पड़ने की चिंता जताई जाती है। बड़े समूहों में इनके रहने से शोर और बीट की समस्या भी पैदा होती है, जिससे रखरखाव संबंधी परेशानियां बढ़ती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इनकी आबादी को नियंत्रित करने के लिए समुदाय की भागीदारी और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण की जरूरत है।
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