जापान के हिरोशिमा में कुछ पेड़ ऐसे हैं जो 1945 के परमाणु बम हमले के बावजूद जीवित बच गए थे। इन्हें ‘हिबाकुजुमोकू’ कहा जाता है। बम विस्फोट से इन पेड़ों के तने झुलस गए थे, लेकिन बाद में उन्हीं जले हुए तनों से नई हरी पत्तियां निकल आईं। इनमें जिन्कगो जैसे पेड़ आज भी मजबूती से खड़े हैं और प्रकृति की अद्भुत सहनशीलता का उदाहरण पेश करते हैं। शोधकर्ता इन पेड़ों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि ये क्षतिग्रस्त डीएनए की मरम्मत कैसे करते हैं। इन पेड़ों के बीज दुनिया भर में भेजे जाते हैं, जो उम्मीद, शांति और पुनर्निर्माण का प्रतीक बन चुके हैं। हिरोशिमा के ये पेड़ मानव इतिहास की त्रासदी के बीच प्रकृति की जीवटता और जीवन की शक्ति को दर्शाते हैं।
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