बालोद शुक्रवार को जिला आदिवासी कांग्रेस ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का पुतला दहन किया। विरोध का कारण मूल आदिवासियों को वनवासी कहकर अपमानित करना बताया गया। लता कोर्राम ने कहा कि भारत में मूलनिवासी को आदिवासी कहा जाता है। भाजपा और आरएसएस लगातार वनवासी शब्द का इस्तेमाल कर आदिवासियों का अपमान कर रहे हैं। आदिवासी को आदिवासी ही रहने दिया जाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज दुनिया का सबसे पुरातन समाज है। वनवासी उन्हें कहा जाता है जो कुछ समय के लिए जंगल में रहते हैं। उन्होंने रामचंद्र के 14 वर्षों के वनवास का उदाहरण दिया। कहा कि आदिवासी आदिकाल से जंगल में निवासरत हैं। इसलिए उन्हें आदिवासी कहा जाता है, वनवासी नहीं। उन्होंने बिरसा मुंडा, वीरनारायण सिंह, गैंद सिंह का जिक्र किया और कहा कि उनके पूर्वज अंग्रेजों से लड़े थे। कार्यक्रम में चंद्रेश हिरवानी, नरेंद्र सिन्हा, अमृता नेताम, भूपेश सहारे, मुरलीधर भुआर्य, राजकुमार प्रभाकर, राकेश उइके, ललित कंवरे, कमलेश श्रीवास्तव, धर्मेंद्र रामटेके, अंचल साहू, धीरज उपाध्याय, वैभव साहू, सुमित शर्मा आदि मौजूद रहे।
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