लुइज़ियाना विधायिका ने नया कांग्रेसी नक्शा पारित कर दिया है। यह नक्शा रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में माना जा रहा है। अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद यह कदम उठाया गया है। नए नक्शे में एक ऐसे जिले को हटा दिया गया है जहाँ अश्वेत मतदाता बहुमत में थे। इस फैसले से अल्पसंख्यकों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह चुनावी निष्पक्षता को कमजोर करता है। रिपब्लिकन का तर्क है कि नक्शा कानूनी और संवैधानिक मानदंडों पर खरा उतरता है। हालाँकि, नागरिक अधिकार समूहों ने इस पर चिंता जताई है। उन्हें डर है कि अश्वेत समुदाय की आवाज़ कमजोर हो जाएगी। यह परिवर्तन 2024 के चुनावों को प्रभावित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने राज्यों को नक्शे बदलने की छूट दी थी। लुइज़ियाना ने इसी छूट का फायदा उठाकर नक्शा पारित किया। अब इस मामले में और कानूनी चुनौतियाँ आ सकती हैं। विपक्षी दल इसे ‘जेरीमैंडरिंग’ का उदाहरण बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला अदालतों में गूंज सकता है।
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