मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एमडीएमके) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस से अलग होने का फैसला किया है। यह गठबंधन पिछले नौ वर्षों से जारी था। पार्टी ने वैचारिक मतभेदों और गठबंधन में अपनी राजनीतिक पहचान कमजोर पड़ने को इस फैसले का प्रमुख कारण बताया। एमडीएमके नेताओं ने गठबंधन में मिले व्यवहार पर भी असंतोष जताया। उनका कहना है कि उन्हें कई चुनावों में डीएमके के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना पड़ा। पार्टी का मानना है कि इससे उसकी स्वतंत्र पहचान प्रभावित हुई। हाल के विधानसभा चुनावों के बाद तमिलनाडु की राजनीति में कई बदलाव देखने को मिले हैं। इन्हीं परिस्थितियों के बीच एमडीएमके ने गठबंधन छोड़ने का निर्णय लिया। पार्टी ने फिलहाल अपने भविष्य के राजनीतिक गठबंधन पर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। आने वाले समय में संगठन अपनी आगे की रणनीति और संभावित सहयोगियों पर विचार करेगा। इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
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