देशभर में बैंक कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल की। अमृतसर में भी विभिन्न बैंकों के कर्मचारी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। हड़ताल का सबसे अधिक असर सरकारी बैंकों के कामकाज पर पड़ा। बैंकिंग लेन-देन, चेक क्लियरेंस और अन्य सेवाएं प्रभावित होने से ग्राहकों को परेशानी हुई। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। यह हड़ताल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन के चंडीगढ़ सर्कल और ऑफिसर्स यूनियन के आह्वान पर हुई। यूनियन नेताओं के अनुसार, 8 मार्च 2024 को सरकार के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते में प्रतिदिन काम के समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी के साथ सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने का फैसला हुआ था। कर्मचारियों का आरोप है कि कई दौर की बातचीत के बावजूद यह व्यवस्था लागू नहीं की गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रोत्साहन राशि में भेदभाव का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि बड़े अधिकारियों को लाखों रुपये तक की इंसेंटिव राशि मिलती है, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों और क्लेरिकल स्टाफ को कम लाभ मिलता है। यूनियनों ने सभी कर्मचारियों के लिए समान प्रोत्साहन राशि की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल की चेतावनी दी गई है। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की भी बात कही गई है। यूनियन नेताओं ने बताया कि सरकार को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है।
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