छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में, जिसे कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब सकारात्मक बदलाव की बयार बह रही है। कभी नक्सली खौफ के कारण वोट डालने से कतराने वाले लोग अब लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। खूंखार नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव पूवर्ती में पहली बार वोटर कार्ड बनवाने के लिए ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। करीब 400 नए मतदाता इस बार वोटर लिस्ट में शामिल होंगे।
भास्कर टीम की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, 16 जून से राज्य के अन्य हिस्सों की तरह ही यहां भी स्कूल खुल गए हैं और विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। जगरगुंडा में अब बसें चल रही हैं और बैंक शाखाएं खुल गई हैं, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन आसान हुआ है। बुर्कापाल और ताड़मेटला जैसे संवेदनशील इलाकों में भी अब भय का माहौल कम हुआ है। हालांकि, सुरक्षा के दृष्टिकोण से अब भी जगह-जगह सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ रिजर्व पुलिस बल के कैंप मौजूद हैं। सरकार अब ‘इनक्लूसिव विकास’ मॉडल पर जोर दे रही है, जिसमें स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करते हुए विकास किया जाएगा। स्थानीय लोग अब अपनी समस्याओं पर खुलकर बात करने लगे हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। दशकों के संघर्ष के बाद, बस्तर के इन सुदूर गांवों में विकास और शांति की नई उम्मीद जगी है।
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