छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पुरानी प्रतीक्षा सूची से की गई नियुक्तियों को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुरानी सूची का उपयोग करके नई नियुक्तियां करना नियमों के विरुद्ध है। यह मामला एक भृत्य और एक शिक्षिका की सेवा समाप्ति से जुड़ा है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि चयन प्रक्रिया समाप्त होने के उपरांत प्रतीक्षा सूची का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने संबंधित भृत्य और शिक्षिका की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रक्रियात्मक स्पष्टता और कानूनी नियमों की अनदेखी पर कड़ा रुख अपनाया। यह निर्णय उन सभी सरकारी भर्तियों के लिए एक नजीर साबित होगा जहां प्रतीक्षा सूची के दुरुपयोग की संभावना रहती है। न्यायाधीशों ने भर्ती के नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी नियुक्ति को सही ठहराने का प्रयास किया था, लेकिन कोर्ट ने कानूनी तथ्यों के आधार पर इसे खारिज कर दिया। यह फैसला प्रशासन को भविष्य में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। इस कानूनी हस्तक्षेप से राज्य में भर्ती से संबंधित विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी। कोर्ट के इस सख्त रुख से सरकारी नौकरियों में योग्यता और नियमबद्धता सुनिश्चित होगी।
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