भारतीय मूल के एक रेडियोलॉजिस्ट ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कार को 250 फीट गहरी खाई में गिरा दिया था। इस घटना ने उस समय व्यापक चर्चा बटोरी थी। दुर्घटना के बाद डॉक्टर के खिलाफ हत्या के आरोप लगाए गए थे। मामले की लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष ने इसे जानबूझकर किया गया कृत्य बताया था। बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध किया। उपलब्ध साक्ष्यों की अदालत ने विस्तार से समीक्षा की। अंततः अदालत ने हत्या के आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद डॉक्टर को कानूनी राहत मिल गई। घटना के करीब दो साल बाद वह एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में बाहर आया। यह फैसला मामले का महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। हालांकि, इस मामले ने कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर कई सवाल भी खड़े किए हैं।
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