भारत एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को तेजी से बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार ने 2027 के अंत तक देशभर में 5,000 एथेनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है। इस पहल का उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना है। इससे कच्चे तेल और अन्य ईंधनों के आयात में कमी आने की उम्मीद है। भारत का वार्षिक ईंधन आयात बिल लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुंचता है। एथेनॉल के बढ़ते उपयोग से इस खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। दिल्ली-एनसीआर, पुणे और अन्य प्रमुख क्षेत्रों को इस विस्तार योजना में शामिल किया गया है। सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी बढ़ावा दे रही है। ये वाहन पेट्रोल और एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर चल सकते हैं। योजना से किसानों की आय बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है। एथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ेगी। उच्च एथेनॉल मिश्रण को अपनाने के लिए नियामकीय बदलावों का प्रस्ताव भी दिया गया है। इसके अलावा अन्य वैकल्पिक ईंधनों को प्रोत्साहित करने की तैयारी की जा रही है। यह पहल ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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