सुप्रीम कोर्ट फिटनेस बैंड की कानूनी श्रेणी को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई कर रहा है। मामला इस बात पर केंद्रित है कि क्या फिटनेस बैंड को संचार उपकरण माना जाना चाहिए। आयातक कंपनी GOQii Technologies का कहना है कि उसके उपकरण मुख्य रूप से स्वास्थ्य और गतिविधि मापने के लिए बनाए गए हैं। कंपनी के अनुसार इनका प्रमुख उद्देश्य डेटा ट्रांसमिशन नहीं है। दूसरी ओर, सीमा शुल्क विभाग ने इन्हें संचार उपकरण की श्रेणी में रखा है। संबंधित न्यायाधिकरण ने भी इस वर्गीकरण को सही माना था। अधिकारियों का तर्क है कि उपकरण ब्लूटूथ कनेक्टिविटी से लैस हैं। ये स्मार्टफोन और अन्य डिवाइसों के साथ डेटा साझा कर सकते हैं। फिटनेस संबंधी जानकारी को कोच और अन्य प्लेटफॉर्म तक भेजा जा सकता है। इसी क्षमता के आधार पर इन्हें संचार उपकरण माना गया। कंपनी इस व्याख्या को चुनौती दे रही है। सुप्रीम कोर्ट अब तकनीकी विशेषताओं और उपयोग के आधार पर अंतिम निर्णय करेगा। फैसले का असर फिटनेस और वियरेबल टेक्नोलॉजी उद्योग पर पड़ सकता है। यह निर्णय भविष्य में ऐसे उपकरणों के आयात और कर निर्धारण को भी प्रभावित कर सकता है।
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