कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीबीएसई ओएसएम विवाद को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के पास ‘मन की बात’ में आम के बारे में बात करने का समय था, लेकिन 18.5 लाख छात्रों के लिए समय नहीं, जिनकी उत्तर पुस्तिकाएं मोबाइल फोन से स्कैन की गईं। राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी की चुप्पी अब उदासीनता नहीं, बल्कि ‘मिलीभगत’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीएसई की ओएसएम टेंडर प्रक्रिया में नियमों को ढीला करके सीओईएमपीटी कंपनी को पक्ष में रखा गया। शुरुआती टेंडर में स्वचालित रोबोटिक स्कैनर और 300 डीपीआई रिज़ॉल्यूशन की अनिवार्यता थी, लेकिन बाद के टेंडर में इन शर्तों को हटा दिया गया और रिज़ॉल्यूशन घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया। राहुल ने कहा कि धुंधली प्रतियां, गायब पृष्ठ, और बिना स्कैन की गई किताबें ‘गलतियाँ’ नहीं हैं, बल्कि एक विक्रेता के अनुरूप लिखे गए अनुबंध का परिणाम हैं। यह धोखाधड़ी है और जिन बच्चों के अंक गलत मूल्यांकन किए गए, वे इसके शिकार हैं। राहुल ने यह भी सवाल किया कि देश की बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) हार गई, जबकि विफलता का इतिहास रखने वाली सीओईएमपीटी कंपनी को ठेका कैसे मिल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस घोटाले में शामिल हैं, लेकिन पीएम मोदी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। राहुल ने कहा कि पीएम मोदी की चुप्पी साबित करती है कि वे छात्रों के भविष्य से ज्यादा अपनी सरकार के अस्तित्व की परवाह करते हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच होनी चाहिए और कहा कि छात्रों का भविष्य उज्ज्वल बनाने का वादा किया गया है।
Source: Source