भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कर्नाटक, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु देश में सब्सिडी प्रदान करने वाले शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में इन राज्यों का कुल व्यय सब्सिडी योजनाओं पर केंद्रित रहा है। डेटा से पता चलता है कि कुल सरकारी खर्च का लगभग 13.5 प्रतिशत हिस्सा विभिन्न प्रकार की सब्सिडी के लिए आवंटित किया गया है। यह उच्च सब्सिडी आवंटन राज्य सरकारों द्वारा सामाजिक कल्याण और आर्थिक समर्थन कार्यक्रमों को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि सब्सिडी का यह बढ़ता हुआ दायरा राज्यों के राजकोषीय प्रबंधन पर सीधा असर डालता है। हालांकि ये सब्सिडी जनता के लिए राहत का काम करती हैं, लेकिन इनके कारण सरकारी खजाने पर दबाव भी बढ़ रहा है। CAG ने राज्यों को सलाह दी है कि वे सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करें ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके। यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो राज्य स्तर पर सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकताएं स्पष्ट करती है। आने वाले समय में इन राज्यों को अपनी सब्सिडी नीतियों और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
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