शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत द्वारा दलबदलुओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किए जाने से राजनीतिक विमर्श का स्तर गिर गया है। राउत ने आरोप लगाया है कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को बड़ी रकम और अदालती मामलों में राहत का लालच दिया गया था। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। वर्तमान में, बागी गुट के नेता दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और खुद को असली गुट के रूप में मान्यता दिलाने की जुगत में हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता इस स्थिति को संभालने के लिए लगातार विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर दलबदल विरोधी कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं। राउत के तीखे बयानों ने पहले से ही जटिल हो चुके राजनीतिक समीकरणों में और अधिक तल्खी पैदा कर दी है। पार्टी के भीतर टूट की इस प्रक्रिया ने कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है। कानूनी दांव-पेच और जुबानी जंग के बीच दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। आगे का घटनाक्रम राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है।
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