सुप्रीम कोर्ट ने BCCI पर National Sports Governance Act लागू होने को लेकर अहम सवाल उठाया है। अदालत ने पूछा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को इस कानून के दायरे से बाहर क्यों रखा जाना चाहिए। मामले में BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। यदि BCCI और राज्य क्रिकेट संघ NSG Act तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के अधीन आने पर सहमत होते हैं, तो स्थिति बदल सकती है। ऐसी सहमति होने पर क्रिकेट संस्थाओं के कामकाज और प्रबंधन से जुड़े लंबित मुकदमे प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट में लंबित इन मामलों को स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल में स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे क्रिकेट प्रशासन से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए अलग न्यायिक मंच उपलब्ध होगा। अदालत के सवाल से BCCI की स्वायत्तता और नियमन का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। NSG Act का उद्देश्य खेल संस्थाओं के प्रशासन और संचालन के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करना है। BCCI और राज्य क्रिकेट संघों पर इसकी लागू होने की स्थिति क्रिकेट प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। इस मामले में पक्षकारों की सहमति आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए अहम होगी। सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्रिकेट निकायों को कानून के दायरे में किस तरह लाया जा सकता है। लंबित मुकदमों के संभावित स्थानांतरण से कई मामलों की सुनवाई का मंच बदल सकता है। फिलहाल अदालत के समक्ष BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के संबंध में कानूनी स्थिति पर विचार जारी है। मामले में आगे की सुनवाई के बाद तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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