तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट की तलाक की डिक्री को रद्द कर दिया। डिवीजन बेंच में जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस के. सुजाना शामिल थे। अदालत ने पति की ओर से दायर अपील को स्वीकार कर लिया। पति ने फैमिली कोर्ट के तलाक संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने पक्षकारों के बीच हुई कार्यवाही में पारित साझा आदेश को भी निरस्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक अलग रहने को तलाक देने का स्वतः आधार नहीं माना जा सकता। फैसले में वैवाहिक विवादों में कानूनी आधारों की अहमियत पर जोर दिया गया। अदालत का यह निर्णय लंबे समय से अलग रह रहे दंपतियों से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले में फैमिली कोर्ट ने पहले तलाक की डिक्री पारित की थी। पति ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने पति की अपील मंजूर कर ली। इसके साथ ही फैमिली कोर्ट का तलाक संबंधी फैसला प्रभावी नहीं रहा। हाईकोर्ट ने संबंधित कार्यवाही में पारित सामान्य आदेश को भी सेट aside कर दिया।
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