छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 को लेकर बहस शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने डीजे, लाउडस्पीकर और तेज आवाज पर नियंत्रण के उद्देश्य से विधेयक का प्रारूप जारी किया है। सरकार ने मौजूदा नियमों की विसंगतियों को दूर करने के लिए आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। हालांकि, प्रस्तावित विधेयक के कई प्रावधानों पर पर्यावरणविद् नितिन सिंघवी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुलिस विभाग को पत्र भेजा है। सिंघवी का कहना है कि विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने की जरूरत है। उन्होंने जुर्माने की राशि से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, साइलेंस जोन की सीमा निर्धारित करने के नियमों पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है। सार्वजनिक आयोजनों में डीजे बजाने की अनुमति से संबंधित प्रावधान भी आपत्तियों के दायरे में हैं। इस विधेयक का उद्देश्य तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करना है। प्रस्तावित नियमों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि जुर्माना लगाने की व्यवस्था ध्वनि नियंत्रण को किस हद तक प्रभावी बनाएगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में रातभर डीजे बजाने की अनुमति के संबंध में अंतिम नियम स्पष्ट नहीं हैं। विधेयक अभी प्रारूप के स्तर पर है और सरकार ने इस पर सुझाव आमंत्रित किए हैं।
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