छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही सनत नागेश पर रेत के कथित अवैध परिवहन के मामले में खनन विभाग ने ₹25,600 का जुर्माना लगाया है। कार्रवाई के विरोध में हितग्राही एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गया। उसने जब्त रेत और अपने रिश्तेदार के ट्रैक्टर को छोड़ने की मांग की, लेकिन विभाग ने इसे स्वीकार नहीं किया। सनत नागेश का कहना है कि उसने अपने पीएम आवास के निर्माण के लिए कम खर्च में रेत मंगाई थी। उसके अनुसार, 6 अक्टूबर को रेत से भरा ट्रैक्टर पकड़ा गया था, जबकि जुर्माने की कार्रवाई सात दिन बाद की गई। खनन विभाग का कहना है कि 15 अक्टूबर तक नदी-नालों से रेत निकालने पर प्रतिबंध लागू था। हितग्राही ने सवाल उठाया कि रेत उपलब्ध नहीं होने पर वह निर्धारित समय में मकान का निर्माण कैसे पूरा करेगा। वैध रेत खदानों से उत्खनन पर रोक के कारण पीएम आवास के लाभार्थियों को निर्माण सामग्री जुटाने में परेशानी हो रही है। बाजार में रेत खरीदने से निर्माण की लागत बढ़ जाती है, जिससे सीमित बजट वाले परिवार प्रभावित हो रहे हैं। एक स्थानीय पार्षद ने खनन विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई में भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप ने भी अवैध रेत परिवहन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि छोटे हितग्राहियों पर कार्रवाई होती है, जबकि बड़े स्तर पर होने वाले अवैध परिवहन के खिलाफ पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई जाती। जिला खनन अधिकारी अर्चना ठाकुर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। कलेक्टर रणवीर शर्मा ने कहा कि मामला खनन विभाग से संबंधित है और इस पर संबंधित अधिकारी ही जानकारी दे सकती हैं।
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