सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले खाने के तेलों पर लागू इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की है। इस फैसले का उद्देश्य खाद्य तेलों की कीमतों पर दबाव कम करना है। त्योहारों के दौरान मिठाई और स्नैक्स बनाने में खाने के तेल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में आयात शुल्क में कमी से बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। सरकार के इस कदम से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। खाद्य तेलों की कीमतों का असर घरेलू रसोई के बजट पर भी पड़ता है। मिठाई और नमकीन जैसे उत्पादों की लागत में तेल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इंपोर्ट ड्यूटी घटने से आयातित खाद्य तेल की लागत कम हो सकती है। इसका असर आगे चलकर खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की कोशिश खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने की है। हालांकि, खुदरा बाजार में वास्तविक कीमतों पर असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
Source: Source