1898 में भारत के पहले प्रमुख विज्ञान संस्थान की स्थापना के लिए मुंबई को प्रमुख विकल्प माना जा रहा था। जमशेदजी टाटा के विजन ने इस संस्थान की स्थापना की नींव रखी। बाद में मैसूर राज्य ने जमीन और आर्थिक सहायता की पेशकश की। इन प्रस्तावों ने संस्थान के लिए बेंगलुरु का रास्ता मजबूत किया। वैज्ञानिक सर विलियम रैम्जे ने भी बेंगलुरु के पक्ष में जोरदार समर्थन दिया। उन्होंने शहर की जलवायु और उपलब्ध संसाधनों को इसके लिए अनुकूल बताया। संस्थान की स्थापना से जुड़ी औपचारिक प्रक्रियाओं में कई वर्ष लग गए। आखिरकार 1911 में भारतीय विज्ञान संस्थान ने बेंगलुरु में काम शुरू किया। IISc ने दशकों तक भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान ने देश में शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र को नई दिशा दी। बेंगलुरु के वैज्ञानिक और तकनीकी केंद्र के रूप में उभरने में IISc का योगदान अहम रहा। समय के साथ शहर भारत के प्रमुख तकनीकी और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल हो गया। आज बेंगलुरु को भारत के प्रमुख ‘सिलिकॉन हब’ के रूप में जाना जाता है।
Source: Source