मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में दूध की पैकेजिंग से होने वाले प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए भारत का पहला प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाला दूध का पाउच लॉन्च कर रही है। यह नई पैकेजिंग मिट्टी में कुछ ही वर्षों में प्राकृतिक तत्वों में टूट जाएगी, जिससे रिसाइक्लिंग सिस्टम से बचकर निकलने वाला ‘फ्यूजिटिव प्लास्टिक’ कम होगा। इस बदलाव से उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा, न ही दूध की गुणवत्ता या कीमत में बदलाव होगा। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर में प्लास्टिक कचरे की बड़ी समस्या दूध की थैलियों के कारण होती है, जो अक्सर कूड़े में मिल जाती हैं। यह पहल उन प्लास्टिक कचरे को लक्षित करती है जो रीसाइकिल नहीं हो पाता और नालियों, मिट्टी या जलाशयों में चला जाता है। नया पाउच बायोडिग्रेडेबल तकनीक पर आधारित है, जो पर्यावरण के अनुकूल है। इससे लंबे समय में क्षेत्र के प्रदूषण स्तर में कमी आने की उम्मीद है। कंपनी का दावा है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित और प्रभावी है। यह कदम अन्य डेयरियों के लिए भी मिसाल पेश कर सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञ इस पहल का स्वागत कर रहे हैं। अगले कुछ महीनों में यह पाउच बाजार में उपलब्ध होगा।
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