एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग के मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस अभ्यास से मुसलमानों, महिलाओं, प्रवासियों और गरीबों का नाम कट सकता है, जिससे ‘बहिष्कृत भारतीयों’ का एक स्थायी वर्ग तैयार हो जाएगा। ओवैसी का आरोप है कि यह अभियान अवैध आप्रवासियों की पहचान करने की एक साजिश है, जिसमें अब तक लाखों नाम हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इससे देश में ‘पैरानोइया और डर’ का माहौल बन रहा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्वच्छ मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारों को बरकरार रखा है। केंद्र सरकार का कहना है कि पुनरीक्षण पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। ओवैसी ने सरकार से इस अभ्यास को तुरंत रोकने की मांग की है। यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में गरमाया हुआ है। विपक्षी दल भी चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
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