8वें वेतन आयोग के गठन और कार्यान्वयन को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस प्रक्रिया में ‘फिटमेंट फैक्टर’ सबसे महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उपयोग मौजूदा मूल वेतन और पेंशन में एक निश्चित गुणांक (multiplier) लगाकर संशोधित वेतन और पेंशन की गणना करने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार फिटमेंट फैक्टर के निर्धारण में बेहद सतर्क रुख अपना सकती है। हालांकि कर्मचारियों को उम्मीद है कि इसे 2.57 से बढ़ाकर अधिक किया जाएगा, लेकिन राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति जैसे आर्थिक कारकों को देखते हुए सरकार फूँक-फूँक कर कदम उठा रही है। फिटमेंट फैक्टर में मामूली वृद्धि भी सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ डाल सकती है, यही कारण है कि आयोग और सरकार संतुलित दृष्टिकोण अपना सकते हैं ताकि वेतन में बढ़ोतरी भी हो और अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक दबाव भी न पड़े। आगामी समय में इस पर स्पष्ट तस्वीर उभरने की उम्मीद है।
Source: Source