रायपुर के रहने वाले असिस्टेंट कैप्टन रुद्रांश चौबे ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच 90 दिन बिताने का अपना डरावना अनुभव साझा किया है। जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था, तब उनका कार्गो जहाज उसी खतरनाक समुद्री इलाके में फंस गया था। रुद्रांश ने बताया कि हमले का सायरन बजते ही सभी 22 क्रू मेंबर्स जान बचाने के लिए इंजन रूम में छिप जाते थे। उनके जहाज के ऊपर से मिसाइलें, ड्रोन और लड़ाकू विमान लगातार गुजरते थे, और एक बार तो ड्रोन का मलबा भी उनके जहाज पर गिरा था। मानसिक दबाव के बावजूद, टीम ने सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अपना धैर्य बनाए रखा। 6 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर कंपनी ने एक स्पेशल बोट के जरिए रुद्रांश और उनके साथियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, उनका जहाज अभी भी वहीं फंसा हुआ है। यह घटना समुद्र में नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी है। रुद्रांश के अनुसार, उस दौरान जीपीएस स्पूफिंग और तकनीकी समस्याओं के कारण परिजनों से संपर्क करना भी चुनौतीपूर्ण था। घर लौटने पर उनके परिवार ने राहत की सांस ली है। इस बीच, दुबई में फंसे बिलासपुर के 3 पर्यटकों के भी सुरक्षित भारत लौटने की खबर है। रुद्रांश की कहानी पहली नौकरी के दौरान मौत को इतने करीब से देखने और उससे उबरने की एक साहसी मिसाल है।
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