हरियाणा में हाल ही में उजागर हुए धान घोटाले के बाद राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए राइस मिलों के खिलाफ बड़े पैमाने पर जांच अभियान शुरू किया है। इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने प्रदेश भर की 1,401 राइस मिलों के भौतिक सत्यापन और स्टॉक की गहन जांच तेज कर दी है। विशेष रूप से सबसे अधिक प्रभावित तीन जिलों में निगरानी के लिए विशेष जांच दल तैनात किए गए हैं, जो स्टॉक में हेराफेरी और अनियमितताओं की बारीकी से जांच करेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य मिलों में रखे धान की मात्रा और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच के अंतर का पता लगाना है। इस कार्रवाई के तहत अनियमितताएं पाए जाने पर मिल मालिकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने पर लाइसेंस भी रद्द हो सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी खरीद में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा इस कदम से धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन मिलों के संचालन पर लगातार नजर रख रहा है ताकि सरकारी धान का सही प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
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