गुजरात में इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया के पहले दौर की समाप्ति के साथ ही एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है, जिसमें लगभग 27,000 सीटें खाली रह गई हैं। प्रवेश समिति द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्रों ने सीटों का चयन तो किया लेकिन कई महत्वपूर्ण शाखाओं में प्रवेश लेने से परहेज किया। छात्रों के बीच कंप्यूटर और आईटी जैसे विषयों के प्रति गहरा आकर्षण बना हुआ है, जबकि पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं में रुचि कम होती दिख रही है। खाली सीटों की इतनी बड़ी संख्या ने निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रबंधन के सामने संकट खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों से इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। प्रवेश समिति अब दूसरे दौर की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है ताकि इन रिक्त सीटों को भरा जा सके। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम में बदलाव और उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार नए स्किल-बेस्ड कोर्स न होना इसका एक मुख्य कारण है। राज्य सरकार ने खाली सीटों को भरने के लिए कॉलेजों को छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने और बेहतर प्लेसमेंट रिकॉर्ड साझा करने का सुझाव दिया है। फिलहाल, छात्र दूसरे दौर के सीट आवंटन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आने वाले समय में काउंसलिंग की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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