बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता साहा ने पार्टी के अंदर बढ़ती अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पार्टी विरोधी टिप्पणियों और सोशल मीडिया पोस्ट पर अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त न करने का संदेश दिया है। साहा ने कहा कि पिछले कुछ समय से नेता और कार्यकर्ता पार्टी अनुशासन की सीमा लांघ रहे हैं, जिससे संगठन का जनाधार कमजोर हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी पार्टी विरोधी गतिविधियों या बयानों में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से पार्टी नीति की आलोचना करने वालों पर विशेष रूप से नजर रखी जा रही है। साहा का यह बयान अगले विधानसभा चुनावों से पहले एक हेडकाउंट चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में कई नेताओं की नाराजगी और पार्टी विरोधी पोस्ट वायरल होने के बाद शीर्ष नेतृत्व सख्त मोड में आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि साहा का यह कदम संगठन को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश है। हालाँकि, विरोधी दलों ने इसे तानाशाही प्रवृत्ति बताते हुए इसकी आलोचना की है। अब देखना यह है कि पार्टी के अंदर किस स्तर पर कार्रवाई होती है।
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