किरायेदार यदि तय समय पर मकान खाली नहीं करता या बढ़ा हुआ किराया नहीं चुकाता, तो उसके लिए कानूनी परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि, मकान मालिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। वह किरायेदार का सामान जबरन बाहर नहीं फेंक सकता। मकान मालिक बिजली या पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं भी मनमाने ढंग से बंद नहीं कर सकता। ऐसे कदम कानूनी रूप से गलत माने जा सकते हैं। बकाया किराया वसूलने के लिए मकान मालिक को अदालत का सहारा लेना होगा। किरायेदार को बेदखल करने की प्रक्रिया भी कानूनी तरीके से ही पूरी करनी होगी। अदालत दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। यदि किरायेदार दोषी पाया जाता है, तो उसे बकाया राशि, अतिरिक्त खर्च या अन्य कानूनी दायित्वों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किरायेदार और मकान मालिक दोनों को किरायानामा और लागू कानूनों का पालन करना चाहिए। किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया अपनाना ही सबसे सुरक्षित और उचित तरीका माना जाता है।
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