केरल के अब्दुल रहीम 24 साल की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में सऊदी अरब गए थे। वहाँ एक दर्दनाक हादसे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। उस हादसे के बाद अब्दुल को मौत की सज़ा सुनाई गई। वह दो दशकों से अधिक समय तक जेल में बंद रहे। हर दिन फांसी का डर उनके सिर पर मंडराता रहा। उनके परिवार और दोस्तों ने हार नहीं मानी। दुनिया भर में रहने वाले मलयाली समुदाय ने एकजुट होकर उनके लिए धन जुटाया। इस अभियान में हजारों लोगों ने योगदान दिया। कुल 34 करोड़ रुपये की ब्लड मनी इकट्ठी की गई। यह राशि सऊदी प्रशासन को पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दी गई। ब्लड मनी जमा होने के बाद अब्दुल को रिहा कर दिया गया। अब वह सुरक्षित भारत लौट आए हैं। अब्दुल ने अपनी कहानी सुनाते हुए कहा कि उन्होंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि एक छोटी सी गलती उनकी जिंदगी यूँ तबाह कर देगी। उनके संघर्ष ने प्रवासी भारतीयों के लिए विदेशों में सुरक्षा और कानूनी सहायता की अहमियत को उजागर किया है। उनकी वापसी पर केरल में परिवार और दोस्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। यह घटना एकता और मानवीय सहायता की मिसाल बन गई है।
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