पश्चिम बंगाल के मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने रिताब्रत बनर्जी के विपक्ष के नेता (LoP) पद से संबंधित कलकत्ता हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती दी है। यह मामला राज्य की राजनीति में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट ने पूर्व में इस पद को लेकर जो निर्देश दिए थे, उन्हें अब कानूनी समीक्षा के लिए चुनौती दी गई है। शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट के तर्क और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यह कानूनी लड़ाई अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनौती का असर राज्य विधानसभा के कामकाज पर पड़ सकता है। अदालत अब इस नई याचिका पर सुनवाई करेगी और देखेगी कि क्या पिछले आदेश में किसी संशोधन की आवश्यकता है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच की यह खींचतान अब न्यायिक दायरे में है। संबंधित पक्षों ने अपने-अपने तर्क तैयार कर लिए हैं। इस पूरे प्रकरण से राज्य के संसदीय मामलों की राजनीति में गरमाहट आ गई है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं।
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