मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में रंजिश के तहत कुछ लोगों ने कथित तौर पर फर्जी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे कई लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि उनके चेहरे को डिजिटल रूप से एडिट करके अश्लील और भ्रामक वीडियो तैयार किए गए और व्हाट्सएप, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर फैलाए गए। यह डिजिटल साजिश उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार और मानसिक प्रताड़ना का कारण बनी। पीड़ितों ने आईजी (इंस्पेक्टर जनरल) से मिलकर न्याय की गुहार लगाई और साइबर सेल से त्वरित कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिए गए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामग्री की सत्यता की जांच करने की अपील की है। इस घटना ने डीपफेक और डिजिटल हेराफेरी के खतरे को फिर से उजागर किया है। पुलिस आरोपियों की पहचान में जुटी है।
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