ग्वालियर के कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में एक पीएचडी छात्र ने अनोखे अंदाज में अपनी पीड़ा व्यक्त की। वह दस्तावेजों की माला पहने हुए पहुंचा और उसने अधिकारियों को व्यवस्था में लगा ‘दीमक’ बताया। छात्र ने कहा कि शैक्षणिक प्रक्रियाओं में लंबित पड़े कागजात और अधिकारियों की लापरवाही उनके शोध कार्य को अधर में लटकाए हुए है। उसने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी बिना किसी कारण के फाइलें रोके रखते हैं। छात्र ने जनसुनवाई में एक-एक कर सभी लंबित दस्तावेजों को प्रदर्शित किया। उसके गले में फाइलों, आवेदन-पत्रों और आदेशों की माला लटकी हुई थी। उसने कहा कि इन दस्तावेजों के चलते उसकी पीएचडी की डिग्री अटकी हुई है। बार-बार चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों की उदासीनता को उसने ‘दीमक’ की संज्ञा दी जो व्यवस्था को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। छात्र ने मांग की कि उसके मामले की जांच हो और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उसकी इस नाटकीय शिकायत ने मौजूद अधिकारियों और अन्य फरियादियों का ध्यान खींचा। जनसुनवाई के दौरान मौजूद एसडीएम ने तुरंत उसके आवेदन को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। छात्र ने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह भूख हड़ताल पर बैठेगा। यह घटना शैक्षणिक प्रशासन की बड़ी विफलता को उजागर करती है। पीएचडी छात्र की पीड़ा ने उपस्थित सभी लोगों का दिल छू लिया और अधिकारियों को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।
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