प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने देश में लोकसभा सीटों के परिसीमन के लिए एक अभिनव ‘टारगेटेड’ (लक्षित) मॉडल का प्रस्ताव रखा है। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का बँटवारा करने के बजाय, विभिन्न राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व अनुपात को संतुलित बनाए रखते हुए बड़ी निर्वाचन क्षेत्रों का विभाजन करना है। प्रस्तावित मॉडल के तहत, कुल 543 में से 170 सीटों को छोटे हिस्सों में बांटकर लोकसभा की कुल क्षमता को 824 तक बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसमें 59 निर्वाचन क्षेत्रों को दो हिस्सों में और 111 क्षेत्रों को तीन हिस्सों में विभाजित करने का सुझाव है। इस बदलाव से दक्षिणी राज्यों और उत्तर-पश्चिमी राज्यों के बीच सीटों का अनुपात वर्तमान स्थिति के करीब (क्रमशः 23.6% और 45.2%) बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से आगामी आम चुनाव में मतदाता मतदान प्रतिशत में 0.3 से 2.3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। परिषद का मानना है कि केवल आकार के बजाय निर्वाचन क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय और भाषाई विशेषताओं को आधार बनाकर किए जाने वाले इस विभाजन से लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में सुधार होगा। साथ ही, शहरी इलाकों में महिलाओं की कम मतदान भागीदारी को देखते हुए, परिसीमन के साथ-साथ महिलाओं के लिए विशेष बूथ और विस्तारित मतदान समय जैसे उपायों की भी सिफारिश की गई है। यह मॉडल सरकार द्वारा लाए गए प्रस्तावित परिसीमन विधियों के उद्देश्यों के साथ व्यापक रूप से मेल खाता है।
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