कवर्धा शहर के तीन प्रमुख क्षेत्रों—राजमहल चौक से मठपारा रोड, नंदी विहार और शांतिदीप कॉलोनी—में सड़कों के बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभे लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। करीब 8 से 10 लोहे के भारी खंभे यातायात में बाधा डालने के साथ-साथ किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। इन खंभों को हटाने के लिए लगभग 4 लाख रुपये (40 हजार रुपये प्रति खंभा) का खर्च संभावित है, लेकिन नगर पालिका और बिजली कंपनी के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण यह कार्य अटका पड़ा है। बिजली कंपनी का तर्क है कि सड़क चौड़ीकरण के बाद ये खंभे बीच में आए हैं, जबकि नगर पालिका की ओर से फंड जमा कराने में ढिलाई बरती जा रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बिजली के तार घरों की छतों और बालकनियों के बेहद करीब लटक रहे हैं, जिससे करंट लगने का निरंतर भय बना हुआ है। नगर पालिका अध्यक्ष ने स्वीकार किया है कि उन्हें खंभों की समस्या की जानकारी है, लेकिन फंड और निजी भूमि की उपलब्धता का हवाला देकर वे अभी भी प्रस्ताव भेजने की बात कर रहे हैं। नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के बजाय दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता की एक बड़ी मिसाल है, जहाँ शहर की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को अब इस खतरे के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है। भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन को इन बिजली के खंभों की तत्काल शिफ्टिंग सुनिश्चित करनी होगी।
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