बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ और इसमें 31 पैसे की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही रुपया 94.29 के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को प्रमुख कारण माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने भी रुपये को सहारा दिया है। बाजार में यह उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिका-ईरान के बीच किसी समझौते की संभावना से वैश्विक आपूर्ति स्थिति में सुधार हो सकता है। इससे निवेशकों की धारणा पर सकारात्मक असर पड़ा है। विदेशी पूंजी प्रवाह की संभावना भी रुपये की मजबूती का एक कारण बनी है। कारोबारी अब अमेरिका-ईरान समझौते पर होने वाले आगामी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। जिनेवा में प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर बाजार में सतर्कता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों का असर मुद्रा बाजार पर जारी रहेगा। आने वाले दिनों में रुपये की चाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल रुपये में आई यह मजबूती निवेशकों के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है।
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