रायपुर के उरला स्थित 3डी फैक्ट्री में मंगलवार शाम एक भीषण हादसे में तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब 17 वर्षीय नाबालिग अरुण पांडेय टेपिंग यूनिट में ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहा था। सिलेंडर में गैस रिसाव के चलते जोरदार धमाका हुआ, जिसकी चपेट में आकर अरुण समेत पास में खाना बना रहे लाल सिंह और कमल सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। विस्फोट इतना तीव्र था कि मृतकों के शरीर के अंग दूर तक बिखर गए। जांच में फैक्ट्री प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है, जहां पर्याप्त सुरक्षा मानकों का अभाव था और काम वाली जगह पर ही भोजन बनाने जैसी जोखिमपूर्ण गतिविधियां चल रही थीं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा फैक्ट्री में नाबालिगों से काम कराने को लेकर हुआ है। मृतक नाबालिग की उम्र की पुष्टि उसके आधिकारिक पहचान पत्र से हुई, जिसे प्रबंधन ने बिना सत्यापन के काम पर रखा था। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के तहत यह एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए फैक्ट्री मालिकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और विशेषज्ञों की टीम सुरक्षा मानकों की समीक्षा कर रही है। यह घटना औद्योगिक सुरक्षा और बाल श्रम कानूनों के उल्लंघन पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
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