हरियाणा के मिंटू हत्याकांड मामले में जेल में बंद दलजीत सिसाय उर्फ दलजीत सिहाग आज झज्जर जेल से रिहा हो सकता है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था। इस फैसले के बाद उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। दलजीत के वकील जगपाल ने इसे लंबे संघर्ष की जीत बताया है। दलजीत की पत्नी अनीता सिसाय ने उसे न्याय दिलाने के लिए लंबी कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ी। उन्होंने गांव सिसाय में पंचायतें आयोजित कीं, आंदोलन किए और विभिन्न मंचों से अपनी आवाज उठाई। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दलजीत के साथ पवन उर्फ पोना और सुरेंदर उर्फ ढांडा को भी संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हिसार सेशन कोर्ट ने जनवरी 2019 में तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि जब सभी चश्मदीद गवाह अदालत में अपने बयान से मुकर गए हों, तो केवल संदिग्ध एफएसएल रिपोर्ट और पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। यह मामला फरवरी 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हांसी के लालपुरा और ढाणी पाल क्षेत्रों में हुई हिंसा से जुड़ा है। आगजनी और गोलीबारी के दौरान मिंटू की मौत हो गई थी, जबकि कृष्ण और हरफूल गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने शिकायतकर्ता राम अवतार के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दलजीत पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहा है और उसके खिलाफ फिरौती, लूटपाट, जानलेवा हमला तथा हत्या के प्रयास सहित करीब 61 मामलों में वांछित रहने की बात कही गई है। इससे पहले हांसी पुलिस ने उसे हथकड़ी लगाकर बाजार में घुमाया था। जेल में रहते हुए उसके सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट किए जाने के मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई की थी।
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