हालिया वैश्विक संकटों के दौरान भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाढ़, कोविड-19 महामारी और मध्य पूर्व में तनाव जैसी परिस्थितियों में भी ईंधन की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने कई बार लाभ से अधिक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उपभोक्ताओं पर कम पड़े, इसके लिए इन कंपनियों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। अतीत में इनके निजीकरण के प्रयास और कार्यशैली को लेकर आलोचनाएं भी हुईं। इसके बावजूद संकट के समय इनकी उपयोगिता बार-बार साबित हुई है। देशभर में फैला इनका विशाल वितरण नेटवर्क आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियां हर परिस्थिति में इसी स्तर की सार्वजनिक जिम्मेदारी निभा पाएंगी, यह निश्चित नहीं है। इसलिए ऊर्जा सुरक्षा के मामले में सरकारी तेल कंपनियां आज भी भारत की प्रमुख ताकत मानी जाती हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में इनकी रणनीतिक भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने में इनका योगदान देश की आर्थिक स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है।
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