सरगुजा जिले के सीतापुर ब्लॉक की प्रगतिशील महिला किसान अनिमा खेस ने जैविक खेती का अनूठा मॉडल तैयार किया है। उन्होंने महिला समूह के साथ मिलकर अपनी जमीन को रसायन मुक्त बनाया। कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में वे 5 एकड़ में टपक सिंचाई और फसल चक्र अपना रही हैं। इस सीजन में उन्होंने लौकी, कद्दू और डोड़का की बंपर पैदावार ली है। उनकी खेती की सबसे बड़ी विशेषता पूर्णतः रसायन मुक्त होना है। उन्होंने घर पर ही केंचुआ खाद, मटका खाद और गौ-मूत्र कीटनाशक तैयार किया है। मटका खाद फसलों की त्वरित वृद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इस जैविक मॉडल को 10 ग्रामीण महिलाओं के समूह ने मजबूती दी है। ये महिलाएं अब खेतों में काम कर स्वावलंबी बन गई हैं। समूह ने आमदनी बढ़ाने के लिए बीज उत्पादन भी शुरू कर दिया है। वे उत्तम और रोगमुक्त बीज तैयार कर बाजार में बेचती हैं। इन बीजों की काफी मांग है और इससे अतिरिक्त मुनाफा होता है। अनिमा पिछले साल तरबूज और मूंगफली की खेती से भी भारी लाभ कमा चुकी हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तरीकों से ही यह सफलता मिली है। आज वे पूरे संभाग के लिए आदर्श मिसाल बन गई हैं।
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