भारत और म्यांमार में सशस्त्र विद्रोहियों को प्रशिक्षण देने के आरोप में छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट जमानत मिली है। आरोपियों पर सशस्त्र समूहों से जुड़े प्रशिक्षण में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच भारतीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है। आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी की ओर से निर्धारित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं किए जाने पर डिफॉल्ट जमानत का प्रावधान लागू हुआ। अदालत ने इसी आधार पर छह आरोपियों को जमानत दी। डिफॉल्ट जमानत का अर्थ है कि जांच की तय समयसीमा में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर आरोपी को वैधानिक अधिकार के तहत जमानत मिलती है। जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की जांच और कानूनी कार्यवाही आगे भी जारी रह सकती है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अदालत में आगे सुनवाई होगी। मामले में भारत और म्यांमार में कथित गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। आगे की न्यायिक प्रक्रिया में मामले के तथ्यों पर विचार किया जाएगा।
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