आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। इसका उपयोग सामान के उत्पादन, भंडारण और परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने में भी किया जा सकता है। इससे फैक्ट्री से लेकर उपभोक्ताओं तक सामान पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में बदलाव आने की संभावना है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं दीपक कुमार घिदोड़े, एम. रामकुमार, मोहित गोस्वामी और संजीव पराशर ने अपने अध्ययन में जेनरेटिव एआई की भूमिका पर चर्चा की है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि एआई के माध्यम से सप्लाई चेन को अधिक टिकाऊ कैसे बनाया जा सकता है। इसमें उत्पादन से लेकर वितरण तक की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर ध्यान दिया गया है। कंपनियां एआई की मदद से अपने संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के तरीके तलाश सकती हैं। अध्ययन में सरकारी नियमों के अनुपालन को भी महत्वपूर्ण पहलू माना गया है। इसके साथ ही बाजार की बदलती अपेक्षाओं को पूरा करने की चुनौती पर भी विचार किया गया है। पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारियां भी टिकाऊ सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं। जेनरेटिव एआई कंपनियों को इन विभिन्न जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद कर सकता है। यह शोध व्यावसायिक प्रक्रियाओं में आधुनिक तकनीक के उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संबंध को समझने का प्रयास करता है।
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