छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पैतृक संपत्ति में बेटियों के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिता की मृत्यु वर्ष 1980 में होने के आधार पर बेटी को संपत्ति में हिस्से से वंचित नहीं किया जा सकता। इस मामले में संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर भाई और बहन के बीच विवाद था। भाई ने अदालत में अपील दायर कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले में प्रस्तुत तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि केवल पिता की मृत्यु की तारीख बेटी के संपत्ति संबंधी अधिकार को समाप्त करने का आधार नहीं बन सकती। फैसले में बेटियों के संपत्ति अधिकारों से जुड़े कानूनी पहलुओं को महत्वपूर्ण माना गया। हाईकोर्ट ने भाई की अपील खारिज कर दी। इस निर्णय से संबंधित बेटी के संपत्ति में हिस्सेदारी के दावे को राहत मिली है। फैसला पैतृक संपत्ति के विवादों में बेटियों के अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, संपत्ति में वास्तविक हिस्सेदारी का निर्धारण मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करता है।
Source: Source