पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विद्रोह के बीच पार्टी ने अपने सभी प्रमुख मोर्चों (जैसे महिला, युवा, छात्र) को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह कदम पार्टी में बढ़ती बगावत को रोकने की एक आखिरी कोशिश माना जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष को भेजे एक पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी की अध्यक्षा बताया गया, जो संकेत देता है कि विद्रोही गुट उनके खिलाफ नहीं बल्कि विधायी दल के मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ है। सूत्रों के अनुसार, बागी विधायकों ने अभिषेक बनर्जी की विधायी दल के मामलों में किसी भी भूमिका को भी खारिज कर दिया है। पार्टी में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और कयास लगाए जा रहे हैं कि कोई बड़ी फूट हो सकती है। यह घटनाक्रम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है।
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