बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि तलाकशुदा पत्नी अपने पूर्व पति की मृत्यु के बाद भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण का अधिकार व्यक्तिगत प्रकृति का होता है और यह जीवनभर लागू रह सकता है। हालांकि, भरण-पोषण राशि में वृद्धि की मांग करने के लिए दोनों पक्षों का जीवित होना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद ऐसी मांग कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी पहले से तय की गई भरण-पोषण राशि और उसके बकाया भुगतान का दावा कर सकती है। यह राशि पति की संपत्ति या उत्तराधिकार से वसूल की जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि पहले से पारित आदेशों के तहत मिलने वाले अधिकार समाप्त नहीं होते। लेकिन नए सिरे से राशि बढ़ाने का अधिकार पति की मृत्यु के बाद लागू नहीं रहता। यह फैसला भरण-पोषण संबंधी कानूनी प्रावधानों की व्याख्या को स्पष्ट करता है। अदालत ने व्यक्तिगत अधिकार और संपत्ति से जुड़े दावों के बीच अंतर भी रेखांकित किया। इस निर्णय को पारिवारिक कानून के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।
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