देश की विपक्षी राजनीति एक बार फिर बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं तेज हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पहले ही विभाजन का सामना कर चुकी है। कांग्रेस भी अपनी राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक मजबूती को लेकर सवालों के घेरे में है। ऐसे माहौल में कई नेताओं की ‘घर वापसी’ यानी पुराने दलों में लौटने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल पुराने दलों में वापसी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। बदलते राजनीतिक समीकरणों ने दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। नेताओं और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं पहले की तुलना में काफी बदल चुकी हैं। क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बनी हुई है। गठबंधन राजनीति का स्वरूप लगातार विकसित हो रहा है। मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी राजनीतिक दलों को नई रणनीतियां अपनाने के लिए मजबूर कर रही हैं। मौजूदा परिस्थितियां संकेत देती हैं कि विपक्षी राजनीति में पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी रहेगी। आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण और नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
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