हरियाणा में 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए मिंटू हत्याकांड में जेल में बंद दलजीत सिसाय उर्फ सिहाग की आज झज्जर जेल से रिहाई संभव है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा रद्द कर बरी किए जाने के बाद उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। दलजीत के वकील जगपाल ने इसे लंबे संघर्ष की जीत बताया है। इस कानूनी लड़ाई में दलजीत की पत्नी अनीता सिसाय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पति को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन किए, गांव में पंचायतें बुलाईं और विभिन्न मंचों पर अपनी बात रखी। परिवार ने सामाजिक समर्थन जुटाकर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई जारी रखी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हिसार सेशन कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें दलजीत, पवन उर्फ पोना और सुरेंदर उर्फ ढांडा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अदालत ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब चश्मदीद गवाह अपने बयान से मुकर चुके हों, तो संदिग्ध एफएसएल रिपोर्ट और पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती। यह मामला 22 और 23 फरवरी 2016 को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हांसी के लालपुरा और ढाणी पाल क्षेत्रों में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस दौरान आगजनी और गोलीबारी में मिंटू की मौत हो गई थी, जबकि कृष्ण और हरफूल गंभीर रूप से घायल हुए थे। पुलिस ने शिकायतकर्ता राम अवतार के बयान पर मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जनवरी 2019 में हिसार की सेशन कोर्ट ने तीनों को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दलजीत पर फिरौती, लूटपाट, जानलेवा हमला और हत्या के प्रयास समेत करीब 61 मामलों में वांछित रहने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इससे पहले हांसी पुलिस ने उसके सोशल मीडिया पेज से जुड़ी गतिविधियों के मामले में कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
Source: Source