हिमाचल प्रदेश की लगभग 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। इस वर्ष सेब उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत तक गिरावट आने का अनुमान है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने बागानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। मौसम के लगातार बदलते मिजाज से फसल प्रभावित हुई है। इसका असर राज्य के लगभग 2.5 लाख सेब उत्पादक परिवारों पर पड़ रहा है। किसानों की आय में कमी आने की आशंका बढ़ गई है। उत्पादन घटने के साथ खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है। बागवान बेहतर सिंचाई सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। फसल बीमा व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो सेब उद्योग को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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