छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए मीडियाकर्मी कैलाश यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस कारण के जांच और चार्जशीट में 6 साल से अधिक की देरी आरोपी के प्रति प्रताड़ना के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है। मामला 2018 का है, जब पत्रकार ने पुलिस द्वारा एक महिला को हिरासत में रखे जाने की रिपोर्टिंग की थी, जिसके बाद पुलिस ने उन पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट का झूठा मामला दर्ज कर दिया था। कोर्ट ने पाया कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था और याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे, जिसके आधार पर कोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई को कानून का दुरुपयोग माना।
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