घड़ी की सुइयों के दक्षिणावर्त चलने के पीछे हजारों साल पुराना इतिहास छिपा है। समय मापने की यह परंपरा प्राचीन सनडायल से जुड़ी हुई है। करीब 5000 साल पहले इंसानों ने सूर्य की छाया के आधार पर समय का अनुमान लगाना शुरू किया था। उत्तरी गोलार्ध में इस्तेमाल किए गए सनडायल की छाया एक खास दिशा में घूमती थी। इसी दिशा ने बाद में आधुनिक घड़ियों के डिजाइन को प्रभावित किया। जब यांत्रिक घड़ियों का विकास हुआ तो उसी गति को मानक बना लिया गया। इस वजह से आज घड़ी की सुइयां दक्षिणावर्त दिशा में घूमती हैं। यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं बल्कि ऐतिहासिक और भौगोलिक परिस्थितियों का परिणाम था। समय मापने की पुरानी प्रणालियों ने आधुनिक दुनिया की घड़ियों को आकार दिया। वैज्ञानिक और इतिहासकार बताते हैं कि घड़ी की दिशा मानव सभ्यता के विकास से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है। यह छोटा सा बदलाव आज पूरी दुनिया में समय मापने का सामान्य तरीका बन चुका है।
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